“भारत की सबसे बड़ी जीत? बेल्जियम कोर्ट ने चौकसी को घेर लिया — अब लौटना तय!”
“भारत की सबसे बड़ी जीत? बेल्जियम कोर्ट ने चौकसी को घेर लिया — अब लौटना तय!”
एंटवर्प, 23 अक्टूबर 2025: बेल्जियम की अदालत ने गुरुवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि भारत की ओर से मेहुल चौकसी पर लगाए गए आरोप बेल्जियम के कानून के तहत भी अपराध माने जाते हैं। इसका अर्थ यह है कि अब चौकसी के प्रत्यर्पण में कोई कानूनी बाधा शेष नहीं बची है। यह फैसला उस दिशा में भारत के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, जहां से लंबे समय से चौकसी को वापस लाने के प्रयास जारी हैं।
मुख्य बातें
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एंटवर्प कोर्ट ने भारत के आरोपों को ‘क्रिमिनल ऑफेंस’ माना, कानूनी अड़चनें खत्म। अब अगली सुनवाई में प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर अंतिम मुहर लग सकती है।
भारत सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ED) कई वर्षों से मेहुल चौकसी को भारत वापस लाने की कोशिशों में हैं। चौकसी, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले में मुख्य आरोपी है और उस पर करोड़ों रुपये की बैंक धोखाधड़ी के आरोप हैं। हाल के वर्षों में चौकसी कैरेबियाई देश एंटिगुआ और बाद में बेल्जियम के एंटवर्प शहर में रह रहा था, जहां उसके कारोबारी हित जुड़े बताए जाते हैं।
इस बीच बेल्जियम कोर्ट ने उन सभी दस्तावेज़ों और आरोपपत्रों की विस्तृत सुनवाई की, जिन्हें भारत की तरफ से प्रस्तुत किया गया था। अदालत ने पाया कि “धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और आर्थिक अपराध” जैसी धाराएँ बेल्जियम के कानूनों में भी आपराधिक श्रेणी में आती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि अभियुक्त के खिलाफ प्रारंभिक प्रमाण पर्याप्त हैं और अब यह मामला प्रत्यर्पण की औपचारिक प्रक्रिया के अधीन है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस फैसले पर सावधानी के साथ सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि “यह फैसला भारत की न्यायिक कोशिशों की गंभीरता को पुष्ट करता है। हम बेल्जियम सरकार के साथ आगे की प्रक्रिया पर समन्वय कर रहे हैं।” हालांकि अभी प्रत्यर्पण की अंतिम मंजूरी बेल्जियम के गृह मंत्रालय से आनी बाकी है।
चौकसी की कानूनी टीम ने अदालत में यह दलील दी थी कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक प्रेरित हैं और उसे निष्पक्ष मुकदमे की गारंटी नहीं मिलेगी। लेकिन अदालत ने इन तर्कों को अस्वीकार करते हुए कहा कि “भारत विश्व का मान्यता प्राप्त लोकतांत्रिक देश है जहां न्यायिक प्रक्रिया स्वतंत्र है”। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रत्यर्पण से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अभियुक्त के मानवाधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाए।
फ़ाइल रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने इस मामले में इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस को भी अपडेट करवाया था। चौकसी को 2018 में भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था और उस पर सीबीआई और ईडी के कई चार्जशीट दाखिल हैं। अदालत के इस फैसले के बाद भारत को उम्मीद है कि प्रत्यर्पण वास्तव में अगले कुछ महीनों में संभव हो सकेगा, बशर्ते प्रशासनिक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी हो जाएं।
बेल्जियम की न्यायिक प्रक्रिया में ऐसे मामलों में अंतिम स्वीकृति अक्सर विदेश और आंतरिक मंत्रालयों के बीच समन्वय पर निर्भर रहती है। जानकारों का कहना है कि यह मामला अब बेल्जियम सरकार के उच्च प्रशासनिक स्तर पर चला गया है। आमतौर पर ऐसे अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण में सुरक्षा एजेंसियों और आप्रवासन विभागों के बीच भी संवाद आवश्यक होता है।
भारत में आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि चौकसी को भारत वापस लाया जाता है, तो यह न केवल घोटाले की सच्चाई को पूरी तरह उजागर करेगा बल्कि भविष्य में आर्थिक अपराधों को लेकर कठोर संदेश भी जाएगा। जुलाई 2025 में नीरा मोदी के प्रत्यर्पण के बाद अब चौकसी का मामला सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर माना जा रहा है।
एंटवर्प कोर्ट के फैसले से भारतीय जांच एजेंसियों की कोशिशों को नई ऊर्जा मिली है। भारत अब बेल्जियम सरकार से औपचारिक प्रत्यर्पण आदेश जारी होने की प्रतीक्षा कर रहा है। इस बीच, मेहुल चौकसी की कानूनी टीम ने संकेत दिया है कि वे फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। इससे स्पष्ट है कि मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन निर्णायक मोड़ पर जरूर पहुंच चुका है।
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अदालत का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों के मामलों में भी एक अहम दृष्टांत बन सकता है। यूरोप में आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए कई देशों ने हाल के वर्षों में कानून सख़्त किए हैं, और भारत जैसे देशों के साथ सहयोग बढ़ाया है। अब नजर इस बात पर है कि बेल्जियम सरकार कब चौकसी के प्रत्यर्पण पर अंतिम दस्तखत करती है।
मामले की स्थिति पर नजर बनाए रखी जा रही है। फिलहाल यह कहा जा सकता है कि भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण न्यायिक जीत है, हालांकि अंतिम नतीजे तक पहुँचने में अभी कुछ क़दम बाकी हैं।
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अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स, सरकारी दस्तावेज़ों और न्यायिक स्रोतों पर आधारित है। किसी भी न्यायिक आदेश या अपील की अद्यतन स्थिति समय के अनुसार बदल सकती है।