बिहार चुनाव 2025: महागठबंधन का घोषणापत्र ‘बिहार का तेजस्वी प्रण’ लॉन्च
बिहार चुनाव 2025: महागठबंधन का घोषणापत्र ‘बिहार का तेजस्वी प्रण’ लॉन्च
महागठबंधन ने पटना में आयोजित कार्यक्रम में जारी किया घोषणापत्र; युवाओं से रोजगार, किसानों से सम्मान और महिलाओं से सुरक्षा का वादा।
पटना, 28 अक्टूबर 2025 | रिपोर्ट: TAZA PRIME KHABAR
मुख्य बातें
TAZA PRIME KHABAR आप तक हर पल की ताज़ा खबर। बिहार चुनाव 2025 में महागठबंधन का घोषणापत्र ‘बिहार का तेजस्वी प्रण’ लॉन्च हुआ, जिसमें रोजगार, शिक्षा, खेती और स्वास्थ्य पर खास फोकस दिखा।
बिहार विधानसभा चुनाव के रंग अब पूरी तरह चढ़ चुके हैं। आज पटना में महागठबंधन ने बहुप्रतीक्षित घोषणापत्र ‘बिहार का तेजस्वी प्रण’ जारी किया, जिसमें राज्य के लिए नई दिशा और उम्मीदों का खाका पेश किया गया। तेजस्वी यादव ने इस मौके पर कहा कि यह घोषणापत्र सिर्फ कागज़ नहीं, बल्कि बिहार के युवाओं, किसानों और गरीबों के लिए ‘रोजगार और सम्मान का संकल्प पत्र’ है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि हमारी प्राथमिकता एक ऐसे बिहार की है जहां हर घर में न केवल रोजगार हो बल्कि युवाओं को उनके गृह प्रदेश में सम्मानजनक जीवन मिल सके। उन्होंने दावा किया कि सत्ता में लौटने पर महागठबंधन सरकार बेरोजगारी भत्ता, न्यूनतम मजदूरी सुरक्षा और सरकारी नौकरियों में ठहराव दूर करने जैसे कदम तुरंत उठाएगी।
‘बिहार का तेजस्वी प्रण’ नाम से जारी इस घोषणापत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर भी ठोस योजनाएं शामिल की गई हैं। महागठबंधन ने वादा किया है कि हर जिले में आधुनिक अस्पताल की सुविधा विकसित की जाएगी और सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। तेजस्वी यादव ने कहा कि आने वाले वर्षों में बिहार को “डिजिटल और स्किल हब” के रूप में पहचान दिलाना उनका लक्ष्य है।
घोषणापत्र में किसानों और महिलाओं को भी विशेष स्थान दिया गया है। किसानों को फसल बीमा के साथ भरोसेमंद मंडी व्यवस्था देने का वादा किया गया है, जबकि महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवेश और आर्थिक सशक्तिकरण को दोहरे फोकस के रूप में रखा गया है। तेजस्वी ने कहा कि “हमारी बहनों और बेटियों की सुरक्षा सिर्फ वादा नहीं, यह हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणापत्र युवाओं को लुभाने की एक रणनीतिक कोशिश है। बिहार में पहली बार वोट डालने वाले युवा मतदाताओं की संख्या करीब 41 लाख है, जिनकी दिशा में हल्का झुकाव भी सीटों के समीकरण बदल सकता है। पटना यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अनिल झा ने कहा कि “तेजस्वी इस बार राज्य की युवा आबादी को सीधा संबोधित कर रहे हैं, और घोषणापत्र उसी सोच को प्रतिबिंबित करता है।”
महागठबंधन प्रवक्ता अजय ठाकुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह घोषणापत्र केंद्र और राज्य की नीतियों से अलग, जनहित के एंगल से तैयार किया गया है। उनके अनुसार, सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर युवाओं के लिए भर्ती अभियान और पंचायत स्तर पर रोजगार केंद्र शुरू किए जाएंगे।
चुनावी माहौल में अब एनडीए की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आने लगी है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता संजय जायसवाल ने कहा कि “महागठबंधन के पास सपनों की दुकान है, लेकिन आधार नहीं। तेजस्वी यादव ने जो वादे किए हैं वे व्यावहारिक नहीं।” हालांकि, आरजेडी नेताओं का कहना है कि बिहार अब बदलाव का मन बना चुका है और जनता अब सिर्फ खोखले वादों से आगे बढ़ चुकी है।
बिहार में इसी महीने आचार संहिता लागू हो गई है और पहले चरण की वोटिंग नवंबर के पहले सप्ताह में होनी है। ऐसे में दोनों गठबंधनों के बीच घोषणापत्रों की लड़ाई सीधी मतदाता के दिल तक पहुंचने की कोशिश है। ‘बिहार का तेजस्वी प्रण’ को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है, और ट्विटर पर हैशटैग #BiharKaTejashwiPran ट्रेंड कर रहा है।
तेजस्वी यादव ने अपने भाषण के अंत में कहा कि “यह सिर्फ चुनाव नहीं, भविष्य का सवाल है। बिहार अब ठहरेगा नहीं, आगे बढ़ेगा।” अब देखना यह है कि मतदाता इस घोषणापत्र को विश्वास का दस्तावेज़ मानते हैं या इसे राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखते हैं।
फिलहाल, बिहार की सियासत में ‘बदलाव बनाम भरोसे’ की जंग अब और तेज होती दिख रही है। आने वाले हफ्तों में चुनावी सभाओं और रैलियों के साथ यह मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है।
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अस्वीकरण: इस लेख में दी गई सूचनाएं विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों और रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। TAZA PRIME KHABAR इसकी पूर्ण सटीकता की गारंटी नहीं देता। यह लेख चुनावी घोषणाओं पर आधारित एक रिपोर्ट है, जिसका उद्देश्य पाठकों को ताज़ा राजनीतिक जानकारी देना है।