दुनिया की सबसे बड़ी खबर?: ट्रंप ने रातों-रात किया गाजा में ‘शांति’ का ऐलान! पढ़ें क्या बदल जाएगा.
दुनिया की सबसे बड़ी खबर?: ट्रंप ने रातों-रात किया गाजा में ‘शांति’ का ऐलान! पढ़ें क्या बदल जाएगा.
गाजा समझौता: संघर्षविराम से आगे बढ़कर स्थायी शांति की ओर कदम, व्हाइट हाउस में जश्न का माहौल
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: 14 अक्टूबर 2025
मुख्य बातें
गाजा में संघर्षविराम के बाद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐतिहासिक समझौते का ऐलान किया। उनका दावा है कि यह ‘डील ऑफ द सेंचुरी’ का अगला चरण है, जो मध्य-पूर्व में स्थायी शांति का सूत्रपात करेगी। इस समझौते में हमास के राजनीतिक भविष्य और गाजा के आर्थिक पुनर्निर्माण की शर्तें शामिल हैं। वैश्विक नेताओं की प्रतिक्रियाएँ मिली-जुली हैं, जबकि इजराइल और फिलिस्तीन के अंदरूनी खेमों में अभी भी गहरी दरारें दिख रही हैं।
वॉशिंगटन, डी.सी. से आ रही ताज़ा खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान एक बार फिर मध्य-पूर्व की ओर खींच लिया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के रोज़ गार्डन से एक बेहद ही नाटकीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में गाजा पट्टी को लेकर हुए एक व्यापक समझौते की घोषणा की है। उन्होंने इस समझौते को ‘मध्य-पूर्व में शांति की शुरुआत’ (Peace in the Middle East) करार दिया, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हलचल तेज़ हो गई है। ट्रंप का यह दावा उस वक्त आया है जब गाजा में इजराइल और फिलिस्तीनी गुटों के बीच हालिया संघर्ष विराम को कुछ ही दिन बीते हैं।
ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में कहा कि “हमने वह कर दिखाया जो कोई नहीं कर सका। यह सिर्फ एक संघर्ष विराम नहीं है, यह स्थायी शांति की नींव है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी टीम ने महीनों की गुप्त बातचीत के बाद इस समझौते को अंतिम रूप दिया है, जिसने इस दशकों पुराने संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया है। समझौते के विस्तृत ब्योरे अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार इसमें गाजा के आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए एक बड़ी वित्तीय सहायता पैकेज और हमास की राजनीतिक भूमिका को लेकर कुछ अस्पष्ट लेकिन महत्वपूर्ण शर्तें शामिल हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का संदर्भ समझना बेहद आवश्यक है। पिछले कुछ महीनों से गाजा पट्टी और इजराइल की सीमा पर तनाव चरम पर था, जिसके कारण सैकड़ों लोगों की जान गई और बड़े पैमाने पर ढाँचागत क्षति हुई। मध्य-पूर्व के कई देशों, जिनमें मिस्र और कतर प्रमुख हैं, ने संघर्ष विराम के लिए पर्दे के पीछे से अथक प्रयास किए थे। ऐसे में, ट्रंप का अचानक इस ‘डील’ की घोषणा करना, जिसे कुछ विशेषज्ञ उनकी पुरानी ‘डील ऑफ द सेंचुरी’ योजना का पुनर्जीवित संस्करण मान रहे हैं, ने भू-राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है।
इजराइल की तरफ से प्रधानमंत्री नेतन्याहू (बशर्ते वह अभी भी पद पर हों) की प्रतिक्रिया सावधानी भरी रही है। उन्होंने एक बयान जारी कर समझौते का स्वागत किया लेकिन साथ ही यह भी दोहराया कि इजराइल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। नेतन्याहू ने ट्रंप को उनके ‘ऐतिहासिक प्रयासों’ के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन इजराइली मीडिया में कई सुरक्षा विश्लेषकों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि हमास को दी जाने वाली किसी भी रियायत से भविष्य में उनकी सैन्य क्षमताएं बढ़ सकती हैं।
दूसरी ओर, फिलिस्तीनी अथॉरिटी (PA) ने, जिसका नियंत्रण वेस्ट बैंक पर है, इस समझौते पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। PA के अध्यक्ष अब्बास के कार्यालय से एक बयान आया जिसमें कहा गया कि वे किसी भी ऐसे कदम का समर्थन करेंगे जो फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों की रक्षा करता हो और एक संप्रभु फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना की ओर ले जाता हो। हालांकि, PA ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर समझौते में यरूशलेम (Jerusalem) की स्थिति और शरणार्थियों के मुद्दे को दरकिनार किया गया, तो वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे।
हमास, जो गाजा पट्टी पर शासन करता है, की शुरुआती प्रतिक्रियाओं में एक सतर्क जीत का भाव है। उनके एक वरिष्ठ नेता ने अल-जज़ीरा को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि यह समझौता “फिलिस्तीनी लोगों के प्रतिरोध की जीत” है। इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि समझौते में गाजा पर लगी नाकेबंदी (Blockade) को चरणबद्ध तरीके से हटाने का प्रावधान है, जो उनके लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। हालांकि, इजराइल और पश्चिमी देशों को संदेह है कि हमास अपनी सैन्य क्षमता को कम करने की शर्तों का पालन करेगा या नहीं।
क्षेत्रीय शक्तियों में भी इस घोषणा को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जो पहले ही इजराइल के साथ ‘अब्राहम समझौते’ (Abraham Accords) पर हस्ताक्षर कर चुके हैं, ने समझौते की सराहना की है, इसे मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिए सकारात्मक कदम बताया है। वहीं, ईरान और उसके सहयोगी समूहों ने इस डील को ‘अमेरिका द्वारा थोपा गया समझौता’ और फिलिस्तीनी हितों के खिलाफ एक कदम बताकर इसकी कड़ी निंदा की है। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने भी समझौते पर सवाल उठाए हैं, खासकर फिलिस्तीनी प्रतिनिधित्व की पूर्णता पर।
यूरोपीय संघ (EU) ने भी इस खबर पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें संयम बरतने की अपील की गई है। EU के विदेश नीति प्रमुख ने कहा कि वे समझौते का विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं और केवल एक न्यायसंगत और समावेशी समाधान ही दीर्घकालिक शांति ला सकता है, जिसके लिए उन्हें दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) के सिद्धांत पर ही लौटना होगा। यूरोपीय संघ का रुख स्पष्ट है कि किसी भी शांति पहल को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करना चाहिए।
यह समझौता कितना सफल होता है, यह गाजा के पुनर्निर्माण और हमास की भविष्य की राजनीतिक भागीदारी पर निर्भर करेगा। गाजा में युद्ध के बाद लाखों लोग बेघर हो गए हैं और बुनियादी ढाँचा पूरी तरह तबाह हो चुका है। समझौते के तहत, पुनर्निर्माण के लिए धन जुटाना और इसका वितरण करना एक बड़ी चुनौती होगी, खासकर जब तक इजराइल नाकेबंदी पूरी तरह से नहीं हटा लेता। इसके अलावा, फिलिस्तीनी गुटों – हमास और फतह – के बीच अंदरूनी तालमेल बिठाना भी एक पेचीदा मसला बना हुआ है।
फिलहाल, वैश्विक मंच पर ट्रंप की इस घोषणा ने उन्हें एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह उनके राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ा दांव है। यदि यह समझौता सफल होता है, तो इसे उनकी कूटनीतिक विरासत में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाएगा। लेकिन यदि यह प्रयास विफल होता है और हिंसा फिर से भड़कती है, तो उनकी घोषणा को केवल एक राजनीतिक स्टंट के तौर पर देखा जाएगा। 14 अक्टूबर, 2025 का यह दिन मध्य-पूर्व के इतिहास में एक नया मोड़ साबित हो सकता है।
गाजा समझौते को लेकर विस्तृत ब्योरा जैसे-जैसे सामने आएगा, आपको हर पल की अपडेट देता रहेगा। अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों की अगले दौर की बैठकें जल्द ही होने की उम्मीद है, जिसमें इस ‘शांति की शुरुआत’ को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
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संक्षेप में, डोनाल्ड ट्रंप ने एक बोल्ड दावा पेश किया है, लेकिन मध्य-पूर्व की जटिलताओं को देखते हुए यह यात्रा लंबी और चुनौतियों से भरी है। शांति का यह पौधा कितना फलेगा-फूलेगा, यह आने वाले दिनों में क्षेत्र के नेताओं के संयम, संकल्प और समावेशी दृष्टिकोण पर निर्भर करेगा। कहानी अभी भी जारी है।
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